
अगले दिन सुबह अर्जुन जल्दी उठ गया। घड़ी में 6:45 हो रहे थे। वह सीधा अपने दोस्त सुनील के कमरे की ओर गया और बोला,
“भाई, कितनी देर में निकलना है?”
सुनील ने मुस्कुराकर कहा, “बस नाश्ता कर लेते हैं, फिर निकलते हैं।”
दोनों कैंटीन पहुँचे, हल्का-फुल्का नाश्ता किया। तब तक लगभग 7 बज चुके थे। नाश्ते के बाद दोनों सड़क पर आए और ऑटो पकड़कर कोचिंग पहुँचे।

![Life Interrupted [With Audio Narration]](https://sk0.blr1.cdn.digitaloceanspaces.com/sites/66972/posts/1411213/IMG20251213123835.png)
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